Friday, June 20, 2014

तुम्हारा नाम लिखेंगे


मुकद्दर-ए-दस्त के हर सफे पे तुम्हारा नाम लिखेंगे
तुम्हीं से आगाज और तुम्हीं से अपना अंजाम लिखेंगे
याद आएगी जब तुम्हारी तुम्हें पैगाम लिखेंगे
खत में तुम्हें हम अपना सलाम लिखेंगे
और फिर उसमें लफ्ज-ए-मोहब्बत तमाम लिखेंगे

दूर तुम्हें हम खुद से कभी होने नहीं देंगे
अपनी चाहत को हम कभी खोने नहीं देंगे
हमारे दरमियां कभी फासलों को आने नहीं देंगे
जर्रे-जर्रे पे अपने इश्क का कलाम लिखेंगे
मुकद्दर-ए-दस्त के हर सफे पे तुम्हारा नाम लिखेंगे

जहां की सारी खुशियों को तुम्हारे दामन में भर देंगे
दिल अपना निकालकर तुम्हारे कदमों में रख देंगे
आंसू का एक कतरा भी आंखों से गिरने नहीं देंगे
आशिकी की किताब में खुद को तुम्हारा गुलाम लिखेंगे
मुकद्दर-ए-दस्त के हर सफे पे तुम्हारा नाम लिखेंगे

Tuesday, June 17, 2014

बस इतना है कहना


बहुत कुछ अनकहा है मेरे और तुम्हारे बीच
बहुत कुछ है जो कहना चाहती हूं मैं तुमसे
बताना चाहती हूं तुम्हें कि
तुम्हारे होने से ही 
मुझे अपनी धड़कनोें का एहसास होता है
तुम्हारी एक धीमी सी मुस्कारहट भी 
मुझमें नई ऊर्जा का संचार कर जाती है
तुम्हारा मुझसे ये कहना कि 
नहीं रह सकते तुम मेरे बिना
मेरे वजूद को और मजबूत बना देता है
जब कोई करता है तुम्हारी तारीफ तो
मुझे खुद पर गर्व का अनुभव होता है
जब तुम मेरा हाथ पकड़ते हो तो लगता है 
कि जीवन का हर युद्ध हैं जीत जाऊंगी
तुम्हारा साथ मुझे जेठ की दुपहरी में भी
ठंडक सा दे जाता है
तुमसे दूर होने का खयाल भी मुझे
भीड़ में तन्हा कर जाता है
तुम्हारी आंखों में चाहत की वो शिद्दत देखकर
तुम पर फना हो जाने को जी चाहता है
तुम्हारे बिना गुजारे कुछ पल भी मुझे 
सदियों से लम्बे लगते हैं और
तुम्हारे साथ बिताए कई घंटे 
मिनटों में बदल जाते हैं
अब मुझे तुमसे बस इतना है कहना
कि मुमकिन नहीं है मेरा तुम्हारे बिना रहना

Sunday, June 15, 2014

दाह-संस्कार


उम्र में तरुणाई सी छाने लगी थी
बचपन से निकल कर मन यौवन की कुलाचें भरने लगा था
कई रंगीन सपने उसकी आंखों में पलने लगे थे
प्रेम के मोती हृदय की सीपी से बाहर निकलने लगे थे
सफेद घोड़े पर बैठा राजकुमार उसे हर पल नजर आता था
और आज तो वो राजकुमार उसके सामने था
उसे लगा कि उसकी उम्मीदों को आज परवाज मिल गई
खो जाना चाहती थी वो उसकी बाहों में
पंख लगाकर उड़ जाना चाहती दूर आसमान में
फिर एक दिन ले गया वो उसको अपने साथ
ये कहकर, कि दूर कहीं हम अपने प्यार का एक जहां बसाएंगे
एक-दूसरे से किए हर वादे को ता-उम्र निभाएंगे
लेकिन ये क्या, वो तो छोड़ आया उस मासूम लड़की को
वहां जहां हर दिन न जाने कितनी लड़कियां बेमौत मरती थीं
अभी-अभी तो लड़की के परों में जान आई थी
और अभी उसको पिंजड़े में कैद कर दिया
सहमी हुई सी लड़की बेचैन निगाहों से 
ताक रही थी चिर शून्य आसमान
जहां उसे अपना भविष्य काले बादलों में 
खोता हुआ नजर आ रहा था
हर दिन उसे परोस दिया जाता था 
कई अनचाहे मेहमानों के सामने जो
पल-पल उसके जिस्म से उसकी सांसे खींच रहे थे
नन्ही सी वो कली अब एक जिंदा लाश में तब्दील हो गई थी
जिसका बस दाह-संस्कार होना बाकी था।

Saturday, June 14, 2014

मेरे पापा

दूसरी बेटी होने पर जब सब ने मां को कोसा।
पापा ने आगे बढ़कर उस दिन सबको रोका।।

पहली बार उन्होंने जब मुझे गोद में उठाया।
कहते हैं वो उस दिन को, मैं कभी भुला न पाया।।

लड़ती थी मैं उनसे, झगड़ती थी मैं उनसे।
बरगद से लता की तरह, लिपटती थी मैं उनसे।।

घुटनों के बल चलकर, गोद में मैं चढ़ जाती थी।
फलों की आढ़त वाला दूल्हा लाना, कहकर मैं इतराती थी।।

मेरे पीछे-पीछे दौड़कर मुझे साइकिल चलाना सिखाया।
अपने हर फर्ज को उन्होंने बखूबी निभाया।।

मेरे गिरने से पहले ही उन्होंने मुझे संभाला।
मेरी हर ख्वाहिश को अपने सपनों सा पाला।।

जो कुछ भी मैंने पाया, उनसे ही है पाया।
सिर पर पापा का हाथ जैसे तरुवर की है छाया।।

दूर रहकर भी मुझसे, दिल से हैं वो मेरे पास।
पापा की प्यारी बेटी होने सा नहीं है कोई एहसास।।

Wednesday, June 11, 2014

एसिड अटैक फाइटर

एक छोटी लड़की
यही कोई 15-16 साल की
मस्ती में झूमती, कुछ गाती, गुनगुनाती
चली जा रही थी अपनी ही धुन में 
उसकी छोटी-छोटी आंखों में 
बड़े-बड़े कुछ सपने थे
चाहत थी जिंदगी में कुछ करने की
खुद को अलहदा साबित करने की
कि अचानक सामने से आते एक लड़के ने
फेंक दिया उसके ऊपर तेजाब....
जिस से जल गया उसका शरीर
और उससे भी कहीं ज्यादा
शायद झुलस गया था उसका मन
वो जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थी
और उसके अपराधी खुलेआम
सड़कों पर घूम रहे थे
लेकिन लड़की ने हिम्मत नहीं हारी
खुद को संभाला उसने और
एक बार फिर उठ खड़ी हुई
अपनी लड़ाई आप लड़ने के लिए
कुछ ही समय में उसने दिला दी
अपने अपराधियों को सजा और
दिखा दिया दुनिया को कि वो 
वाकई में है सबसे अलहदा
आज फिर उसकी आंखों में 
पहले जैसी चमक थी और चेहरे पर रंगत
क्योंकि बन गई थी वह 
हर लड़की के लिए प्रेरणा स्रोत
अब वह एसिड अटैक विक्टिम नहीं
एसिड अटैक फाइटर थी। 

Sunday, June 8, 2014

हुनर को परवाज देती ब्लॉगिंग

रचानात्कता एक ऐसी चीज है जो इस दुनिया की बाकी किसी भी चीज से ज्यादा सुकून देती है। या यूं कहा जाए कि आप अपने मन की भावनाओं को अपनी रचनाशीलता से ही कई बार बाहर निकाल पाते हैं। कुछ लोग अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए पेंटिंग बनाते हैं, तो कुछ कविताएं लिखते हैं, कुछ लोग जज्बातों को शेरो-शायरी में पिरो देते हैं और कुछ मुक्तक और छन्द बनाते हैं। दरअसल अपनी भावनाओं को मूर्त रूप देने से ज्यादा सुखद अनुभूति तब होती है जब आपकी रचनाओं को सराहने वाले कोई मिल जाता है। और ऐसा मौका आपको ब्लॉग के जरिए मिलता है। शायद यही वजह है आजकल ब्लॉगिंग युवाओं को बहुत भा रही है।

24 साल की श्रुति को कविताएं लिखना बहुत पसंद है, लेकिन वह अपनी कविताओं को अपनी जान-पहचान के लोगों को पढ़ाने में हिचकिचाती है। उसे लगता है कि अगर उसकी कविता अच्छी नहीं हुई  तो लोग उसका मजाक बनाएंगे। लेकिन वह उसे लोगों के सामने भी लाना चाहती है, ऐसे में उसे खयाल आया कि क्यों न अपना एक ब्लॉग बनाऊं और
अपनी सारी कविताओं को उसमें ही डालूं। इस बहाने लोग मेरी कविताओं को पढ़ भी लेंगे। अगर उन्हें मेरी कविता पसंद आई तो मुझे तारीफ मिल जाएगी और अगर पसंद नहीं आए तो प्रत्यक्ष रूप से लोग मेरा माजक भी नहीं बना पाएंगे।

दरअसल यह कहानी सिर्फ श्रुति की ही नहीं है, बल्कि और भी कई ऐसे युवा हैं जिनके अंदर प्रतिभा तो है लेकिन वे इसे दुनिया के सामने लाने में हिचकिचाते हैं। ऐसे ही लोगों को ब्लॉगिंग साइट्स ने एक ऐसा मंच प्रदान किया है जो उनकी प्रतिभा को दुनिया के सामने प्रदर्शति करने का मौका देता है वह भी बिना किसी प्रत्यक्ष परिचय के।

ब्लॉगिंग का इतिहास
ब्लॉगिंग से जुड़ा शब्द  वेबलॉग सबसे पहले 1997 में जॉर्न बार्गर द्वारा इस्तेमाल किया गया। अप्रैल या मई 1999 में पीटर मेरहोल्ज ने अपने ब्लॉग पेट्रीम में मजाक में वेबलॉग को तोड़कर वी ब्लॉग लिख दिया। यह शब्द तब लोकप्रिय हो गया जब पाइरा लेबोरेटरीज के इवान विलियम ने पाइरा लेबरोटरीज के साथ मिलकर ब्लॉगर प्लेटफॉर्म बनाया और इसमें पोस्ट की जाने वाली  रचनाओं को ब्लॉग का नाम दिया। हिंदी में पहला ब्लॉग 2003 में शुरू हुआ था।

बढ़ रही है ब्लॉगर्स की संख्या
फरवरी 2011 तक पूरी दुनिया में 15 करोड़ 60 लाख लोग ब्लॉग का उपयोग शुरू कर चुके हैं। भारत में भी अंग्रेजी के अलावा लगभग सभी भारतीय भारतीय भाषाओं में ब्लॉग लिखे जा रहे हैं जिनमें हिंदी सबसे ऊपर है। हिंदी में करीब  30 हजार ब्लॉगर हैं, जिनमें से चार हजार के करीब नियमित ब्लॉग लेखक हैं।

मिलता है एक प्लेटफॉर्म
ब्लॉगिंग उन युवाओं के लिए बहुत अच्छा विकल्प साबित हुआ है जिन्हें कुछ भी क्रिएटिव करना अच्छा लगता है। यहां आपको अपनी रचनाओं को दुनिया के सामने रखने का एक बहुत अच्छा प्लेटफॉर्म मिलता है। साथ ही आप अपनी रचना उन लोगों तक आसानी से पहुंचा पाते हैं जो वाकई में आपकी रचनात्कता को समझते हैं। आजकल ब्लॉग जगत में कुछ लोगोें ने मिलकर कई सामूहिक मंच बना लिए हैं, जिनमें वे आपकी रचनाओं को शामिल करके ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाते हैं। हिंदी ब्लॉग जगत में चर्चा मंच, ब्लॉगवाणी, हमारीवाणी, नई-पुरानी हलचल जैसे कई कई मंच हैं जहां आपकी रचनाओं को स्थान मिलता है और आपको लोगों के बीच अपनी पहचान बनाने का मौका भी।

प्रतिक्रियाओं से मिलता है प्रोत्साहन
आप अपने ब्लॉग में जो कुछ भी लिखते हैं उस पर आपको लोगों की  प्रतिक्रियाएं भी तुरंत मिल जाती हैं। प्रतिक्रियाओं में आपकी तारीफ  भी हो सकती है और आलोचना भी। लेकिन दोनों ही सूरतों में फायदा आपका ही होता है क्योंकि तारीफ और आलोचनाएं दोनों ही आपको और अच्छा करने के लिए प्रेरित करती हैं।

तकनीक ने बनाया आसान
अगर आज से 10-12 साल पहले की बात करें तो लोगों को ब्लॉग के बारे मेें न तो ज्यादा जानकारी थी और न ही इसे इस्तेमाल करने के लिए उनके पास हर समय उपलब्ध तकनीक थी। लोगों को नेट पर अपनी रचनाओं को शेयर करने के लिए स्पेस भी खरीदना पड़ता था लेकिन आजकल जब हर किसी की मोबाइल में इंटरनेट है और हर आपके लिए पर्याप्त स्पेस आपको कई साइट्स पर मुफ्त में मिल रहा है तो यह बहुत ही आसान हो गया है। अब तो कई प्रतिष्ठित समाचार वेबसाइट्स भी अपना स्पेस लोगों को ब्लॉग बनाने के लिए देती हैं।

कुछ युवा करते हैं कमाई भी
ब्लॉग कुछ युवाओं के लिए कमाई का भी जरिया बन गया है। आपके ब्लॉग पर जितने ज्यादा विजिटर्स आते हैं आपके ब्लॉग की लोकप्रियता गूगल पर उतनी ही बढ़ती जाती है और ब्लॉग की लोकप्रियता के आधार पर ही गूगल किसी भी ब्लॉग को विज्ञापन देता है। जिससे ब्लॉग संचालित करने वाली की आय हो जाती है। लेकिन कुछ युवा ऐसे भी हैं जो आपके ब्लॉग को लोकप्रिय बनाने के लिए भी आपसे पैसे लेते हैं और ऐसा वे एक के लिए नहीं बल्कि कई के लिए करते हैं। जिससे उनकी अच्छी-खासी कमाई हो जाती है।

Saturday, June 7, 2014

पागल बुढ़िया


एक बूढ़ी औरत फटे पुराने कपड़े पहने
बैठी थी मोहल्ले के एक चबूतरे पर
उसके सफेद पके बाल बिखरे हुए थे
चेहरे पर अनगिनत झुर्रियां थीं
वह बड़-बड़ा रही थी कुछ
गली के कुछ बच्चों ने उसे देखा
और मारने लगे पत्थर ये कहकर
देखो पागल बुढ़िया, देखो पागल बुढ़िया
बुढ़िया भागने लगी इधर-उधर
बच्चों से बचकर छुप गई एक घर के कोने में
लेकिन घर में रहने वाले लोगों ने भी उसे 
डंडा दिखाकर भगा दिया
वो जमीन पर बैठकर पास पड़े कूड़े में कुछ ढूंढने लगी
शायद भूख लग रही थी उसे बहुत तेज
तभी मिल गए उसे तरबूज के कुछ छिलके
जिसे खोद-खोदकर खाने लगी वो
मोहल्ले के कुछ लोग असंवेदनशीलता की हदें पार कर
उसे यूं कूड़ा खाता देख हंस रहे थे उस पर 
न किसी की आंखों में दया थी और न ही मन में करुणा
चेहरे पर थे तो सिर्फ उपेक्षा और उपहास
के भाव
शायद यही हमारे अत्याधुनिक और 
तेजी से विकसित होते समाज की
पहली निशानी थी।

Friday, June 6, 2014

भीख मांगता बच्चा

चौराहे पर खड़ा एक छोटा बच्चा
हाथ फैलाकर मांग रहा था
किसी से एक किसी से दो 
तो किसी से दस रुपये
आते-जाते कुछ लोग डाल देते थे उसके
कटोरे में कुछ भीख
कुछ लोग दे देते थे उसे खाने के लिए 
कोई बिस्किट तो कोई नमकीन
लेकिन नहीं दे रहा था उसे कोई सीख
कि बेटा नहीं तुम्हारी उम्र मांगने की भीख 
अभी तो पूरा जीवन है तुम्हारे सामने
चाहो तो संवार सकते हो तुम अपनी जिंदगी
अपने इन्हीं हाथों से जिनमें तुमने पकड़ा है कटोरा
लेकिन इसके लिए तुम्हें बस करनी होगी मेहनत
लड़ना होगा अपने हालातों से 
समझना होगा कि भीख मांगना ही नहीं है तुम्हारी किस्मत
कि तुम ही हो इस देश का भविष्य और
नहीं मांगने दोगे तुम भविष्य में इस देश को भीख

Tuesday, June 3, 2014

भारत और पाकिस्तान

बहुत से लोग चाहते हैं कि 
दो पड़ोसी मुल्क एक-दूसरे से
सारे रिश्ते-नाते तोड़ दें

तोड़ दें आत्मीयता की सारी जंजीरें
वे हमारे दुख में खुश हों
और हम उनके दुख में ठहाके लगाएं

आखिर हमारी दुश्मनी भी तो कई साल पुरानी है
उसे निभाना और आगे बढ़ाना 
हमारा ही तो फर्ज है

बंद कर दें हम उनके बारे में बात करना
यहां रहने वाली बहन का 
वहां रहने वाले भाई से मिलना

पाबंदी लगा दें सारे रिश्ते और नातों पर
आयात और निर्यात पर
सिखों के अपने तीर्थ ननकाना साहिब जाने पर

ये सब कर लेंगे हम 
तोड़ देंगे सारे संबंधों को और
बन जाएंगे महान अपनी ही नजरों में

लेकिन क्या हम दो देशों में
बहने वाले एक ही दरिया के पानी को
आपस में मिलने से रोक लेंगे

क्या रोक लेंगे हम उस पार की चिड़िया को
जो अक्सर सरहद पार कर
दाना लेने इधर आ जाती है

क्या यहां रहने वाले नाती का
वहां रहने वाली  नानी से
रिश्ता तोड़ पाएंगे हम

क्या लगा पाएंगे हम पाबंदी
उन लोगों की यादों पर जिन्होंने
वर्षों पहले अपने मुल्क को छोड़ा था

शायद नहीं कर पाएंगे ये सब 
इसीलिए अब और नहीं बांट पाएंगे हम
पहले से बंटे हुए इन दो मुल्कों को