Friday, May 23, 2014

मजूदर औरत

न हूं मैं गार्गी और न ही पद्मावती
न मैं कल्पना चावला और न ही इंदिर नुई
न हूं मैं झांसी की रानी और न ही विजयलक्ष्मी
न मैं मैरी कॉम और न ही अरुंधती
मैं हूं एक साधारण सी मजदूर औरत
मेरे पास नहीं है रंगीन सपनों का आकाश
और न ही नित नई उम्मीदों की जमीन
मेरे पास नहीं हैं रुपये अपनी ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए
हां मेरे पास आकाश है तेज धूप से भरा हुआ
और जमीन भी है जिससे मिट्टी खोदकर
मुझे छठी मंजिल तक ले जानी है
मेरे पास रुपये भी हैं लेकिन अपने भूखे बच्चों का पेट भरने के लिए
मुझे नहीं मिली इतनी शिक्षा की मैं सफलता की उड़ान भरूं
लेकिन मेरे पास है मेरी मेहनत जिससे अपने बच्चों में
अपने सपनों को जी सकूं।