Thursday, August 4, 2016

तुम्हारी मोहब्बत का सावन

बरस रहा है एक सावन कहीं खिड़की के बाहर
मेरे भीतर भी बरसता रहता है एक सावन
तुम्हारे प्यार की रिमझिम फुहार
भिगो देती है मेरे मन को
बारिश की हर बूंद में मुस्कुराते दिखते हो तुम
उन्हें उठाने की कोशिश करती हूं मैं
जैसे अपने हाथों में भर रही हूं तुम्हारा चेहरा
तेज बरसती बारिश में भीगने से होता है
तुम्हारे प्यार में भीगने का अहसास
सावन की हरियाली जैसे ही
ताजे हो जाते हैं तुम्हारे साथ बीते पल
मन में कहीं कूकने लगती है कोयल
जो गाती है हमारी मोहब्बत के तराने
बागों में नाचते मोर की तरह
लगता है जैसे मैंने भी फैला लिए हों पर
और नाच रही हूं मैं भी
कि मुझ पर भी तो बरस रहा है
तुम्हारी मोहब्बत का सावन




Tuesday, July 19, 2016

क्योंकि मोहब्बत है वो

प्यार अक्सर हार जाता है
कोशिशें इसमें कामयाब नहीं होती हैं
अपेक्षाएं फेर देती हैं इस पर पानी
जिसके लिए जीना ही था आपकी जिंदगी
कई बार उसके जीवन की चुभन बन जाते हैं आप
हर पल उसकी ख्वाहिश करना ही
मार देता है आपकी ख्वाहिशें
जिस तरह ताली एक हाथ से नहीं बजती
रिश्ते भी एक तरफ से नहीं निभाए जाते
मोहब्बत यूं ही कम नहीं होती
तरसती है, बिलखती है और कराहती भी
तब कहीं रुक-रुक कर चलता है
उसकी सांसों का सिलसिला
लेकिन वो फिर भी मरती नहीं है
हर खुशी को उसके ऊपर न्योछावर
करने के बाद भी जब वो कहता है
तुमने किया ही क्या है मेरे लिए
ये सुनने के बाद भी
नहीं थमती हैं मोहब्बत की सांसें
बस तड़पती रहती है वो
उसकी आंखों में अपने लिए उपेक्षा के भाव देखकर
फिर भी उम्मीद होती है कि शायद
इस अँधेरे के बाद
उजाला उसके नसीब में भी हो
क्योंकि मोहब्बत है वो
जो कभी खत्म नहीं होती

Wednesday, April 27, 2016

तुमसे ही है इस दिल को करार

मेरी जिंदगी मेरी जरूरत हो तुम
मुमकिन नहीं है मेरे लिए तुम्हारे बिना रहना
मैं हूं थोड़ी अक्खड़, कुछ बत्तमीज भी
झगड़ती हूं तुमसे और रोती भी हूं बेवजह
तुम्हारी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाती मैं
जैसा तुम चाहते हो वैसी नहीं बन पाती मैं
कोशिश तो करती हूं मैं कि बदल दूं खुद को
पर मेरी गलतियां ही फेर देतीं हैं मेरी मेहनत पर पानी
जुबां बहुत कड़वी है मेरी, पर दिल में तुम ही हो
बिन सांसों के हो जैसे जीवन वैसे ही हूं मैं तुम्हारे बिन
कि मेरा दिल भी धड़कता है तुम्हारी धड़कनों से
तुम्हारा अहसास ही जगाता है मुझमें जीने की चाहत
आँखें खुली हों या बंद आते हैं उनमें तुम्हारे ही सपने
चाहती हूं कि जिंदगी का हर पल गुजरे तुम्हारे साथ
कि तुम ही तो इस पूरे जहां में मेरे अपने
मेरी नादानियां कहो या कहो तुम बदमिजाजी
पर तुमसे ही बनता है मेरी ख्वाहिशों का मिजाज
माना मैं हूं गलत पर तुम तो हो सही
माफी मांगती हूं मैं तुमसे फिर एक बार
जहां हो तुम मैं हूं वहीं
 कि तुमसे ही है इस दिल को करार


Monday, April 11, 2016

ऐतबार

तुम भले ही न करो अपने प्यार का इकरार
पर मुझको है तुम पर पूरा ऐतबार

तुम्हारी हूं मैं और रहूंगी भी तुम्हारी
करूंगी सात जन्मों तक मैं तुम्हारा इंतजार

कभी तो बयां करोगे तुम अपने जज्बात
कि तुम्हारे सीने में दबा है बस मेरा प्यार

कोशिश कर लो रोकने की खुद को चाहे जितनी
तुम्हें आना ही होगा मेरे पास बार-बार

पलकों में मेरी सूरत को छुपा पाओगे कैसे
आंखों की जुबां के भी तो लफ्ज होते हैं हजार

तुम्हें पाना है मेरी जिंदगी की ख्वाहिश
मिलो तुम मुझे जहां के इस पार या उस पार

तुम भले ही न करो अपने प्यार का इकरार
पर मुझको है तुम पर पूरा ऐतबार