Saturday, March 18, 2017

लड़कियों की जिंदगी

बेमानी हैं लड़कियों की बराबरी की बातें
खोखले हैं समाज के सारे दावे
आज भी जकड़ी हुई हैं वो रूढ़ियों की जंजीरो में
जैसे सपने में भागते हैं हम
और बार-बार कोशिश करने पर गिर जाते हैं
नहीं पहुंच पाते अपनी मंजिल तक
बिल्कुल उसी सपने की तरह होती है
लड़कियों की जिंदगी
अपने अरमानों को पूरा करने के लिए
करती हैं वो भी बार-बार कोशिश
लेकिन कभी समाज की दुहाई देकर
कभी मां-बाप की इज्जत की दलील देकर
बांध दी जाती हैं उनके पैरों में
उन्हीं पुरानी परंपराओं की बेड़ियां
लाख कोशिश करने पर भी
हजार बार गिर कर संभलने पर भी
नहीं पहुंच पातीं वो अपनी मंजिल तक
और 'खुले विचारों वाली’ लड़कियां भी
घुट कर रह जाती हैं अंदर ही अंदर
झूठी शान की कोठरी में