Sunday, September 21, 2014

बस तुम्हीं हो

तुम्हारे ख्वाबों ने मेरे मन में कुछ ऐसा मकाम बनाया है
कि हर पल मेरे खयालों में बस तुम्हारा ही नाम छाया है

तुम्हारा हाथ थामकर कट जाएगा जिंदगी का सफर
तुम्हारे साथ ही बीतेगा अब हर मौसम और पहर

तुम्हारी आंखों की कशिश में हर शाम डूबा करेंगे
तुम्हारी बाहों के घेरे में ही अब दिन और रात कटेंगे

पहली हो या आखिरी मेरी मोहब्बत बस तुम्हीं हो
हर पल जो मैं करती हूं वो इबादत बस तुम्हीं हो

जिस्म-ओ-जान से अब तुम्हारे बनकर हम जिएंगे
तुम्हारी गोद में सिर रखकर ही हम मौत से मिलेंगे