Tuesday, July 1, 2014

जिंदगी


एक  अबूझ पहेली जिंदगी
एक खुशनुमा अहसास जिंदगी
हर पल कुछ हासिल करने की चाह जिंदगी
कभी काली परछाई सी तो
कभी सुनहरे प्रतिविम्ब सी जिंदगी
हर पल दरकते रिश्तों में 
अपनत्व का गारा भरती जिंदगी
कभी पतंग के माझे सी उलझती
कभी रेशम की डोर सी सुलझती जिंदगी
कभी फूलों सी सुगंध बिखेरती
कभी कांटों सी भेदती जिंदगी
कभी अधूरे ख्वाब सी
कभी सम्पूर्ण विश्वास सी जिंदगी
हमें अपनों से दूर कर रुलाती और फिर
हमारी गोद में किलकारियां दे जाती जिंदगी
हर खुशी, हर गम में हमें अनवरत
 चलते जाने का पाठ पढ़ाती जिंदगी