Tuesday, July 1, 2014

जिंदगी


एक  अबूझ पहेली जिंदगी
एक खुशनुमा अहसास जिंदगी
हर पल कुछ हासिल करने की चाह जिंदगी
कभी काली परछाई सी तो
कभी सुनहरे प्रतिविम्ब सी जिंदगी
हर पल दरकते रिश्तों में 
अपनत्व का गारा भरती जिंदगी
कभी पतंग के माझे सी उलझती
कभी रेशम की डोर सी सुलझती जिंदगी
कभी फूलों सी सुगंध बिखेरती
कभी कांटों सी भेदती जिंदगी
कभी अधूरे ख्वाब सी
कभी सम्पूर्ण विश्वास सी जिंदगी
हमें अपनों से दूर कर रुलाती और फिर
हमारी गोद में किलकारियां दे जाती जिंदगी
हर खुशी, हर गम में हमें अनवरत
 चलते जाने का पाठ पढ़ाती जिंदगी

18 comments:

  1. हर खुशी, हर गम में हमें अनवरत
    चलते जाने का पाठ पढ़ाती जिंदगी
    ...यही ज़िंदगी का सच है...बहुत सुन्दर

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  2. कई मायने हैं ज़िन्दगी के!
    सुन्दर लिखा है आपने।

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    1. आपका धन्यवाद

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  3. बढ़िया है आदरेया
    आभार-

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    1. शुक्रिया
      सादर

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  4. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 03-07-2014 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1663 में दिया गया है
    आभार

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  5. इसे ही तो जिन्दगी कहते है।हर पल बदलती जिन्दगी।
    बहुत खूब।

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  6. बहुत खूब।
    कभी फूलों सी सुगंध बिखेरती
    कभी कांटों सी भेदती जिंदगी..............अच्छे भाव ली हुयी लाइनें

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    1. शुक्रिया प्रभात जी

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  7. जिंदगी की हज़ार रंग में अपने हिस्से कौन से रंग आये ऊपर वाला ही जानता है

    बहुत सुन्दर

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    1. धन्यवाद कविता जी

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  8. बहुत सुंदर ..अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर

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    1. धन्यवाद सुमन जी

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  9. हर खुशी, हर गम में हमें अनवरत
    चलते जाने का पाठ पढ़ाती जिंदगी

    ........बहुत सच कहा है बेहतरीन प्रस्तुति...आभार

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    1. धन्यवाद संजय जी

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