Thursday, August 4, 2016

तुम्हारी मोहब्बत का सावन

बरस रहा है एक सावन कहीं खिड़की के बाहर
मेरे भीतर भी बरसता रहता है एक सावन
तुम्हारे प्यार की रिमझिम फुहार
भिगो देती है मेरे मन को
बारिश की हर बूंद में मुस्कुराते दिखते हो तुम
उन्हें उठाने की कोशिश करती हूं मैं
जैसे अपने हाथों में भर रही हूं तुम्हारा चेहरा
तेज बरसती बारिश में भीगने से होता है
तुम्हारे प्यार में भीगने का अहसास
सावन की हरियाली जैसे ही
ताजे हो जाते हैं तुम्हारे साथ बीते पल
मन में कहीं कूकने लगती है कोयल
जो गाती है हमारी मोहब्बत के तराने
बागों में नाचते मोर की तरह
लगता है जैसे मैंने भी फैला लिए हों पर
और नाच रही हूं मैं भी
कि मुझ पर भी तो बरस रहा है
तुम्हारी मोहब्बत का सावन