
मेरे भीतर भी बरसता रहता है एक सावन
तुम्हारे प्यार की रिमझिम फुहार
भिगो देती है मेरे मन को
बारिश की हर बूंद में मुस्कुराते दिखते हो तुम
उन्हें उठाने की कोशिश करती हूं मैं
जैसे अपने हाथों में भर रही हूं तुम्हारा चेहरा
तेज बरसती बारिश में भीगने से होता है
तुम्हारे प्यार में भीगने का अहसास
सावन की हरियाली जैसे ही
ताजे हो जाते हैं तुम्हारे साथ बीते पल
मन में कहीं कूकने लगती है कोयल
जो गाती है हमारी मोहब्बत के तराने
बागों में नाचते मोर की तरह
लगता है जैसे मैंने भी फैला लिए हों पर
और नाच रही हूं मैं भी
कि मुझ पर भी तो बरस रहा है
तुम्हारी मोहब्बत का सावन
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (06-08-2016) को "हरियाली तीज की हार्दिक शुभकामनाएँ" (चर्चा अंक-2426) पर भी होगी।
ReplyDelete--
हरियाली तीज की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
ख़ूबसूरत अहसासों को पिरोये बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...
ReplyDeleteएक सावन कितने सावन बरसा जाता है ... बादलों का सावन एहसासों का सावन ...
ReplyDeleteऔर नाच रही हूं मैं भी
ReplyDeleteकि मुझ पर भी तो बरस रहा है
तुम्हारी मोहब्बत का सावन
सावन बरसे प्यार का ...बहुत सुन्दर
सुंदर ।
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