Monday, October 20, 2014

तुम भी करोगे मुझसे प्यार

बहुत प्यार करती हूं मैं तुमसे
खुद से भी ज्यादा
शायद रह लूं मैं तुमसे दूर भी
लेकिन नहीं रहना चाहती मैं तुम्हारे बिना
आज मांगना है मुझे तुमसे एक हक
क्या तुम मुझे दोगे ये अधिकार कि
सुबह आंखें खोलकर जिसको
मैं सबसे पहले देखूं
वो चेहरा तुम्हारा हो
जिसके सीने में छिपने से
मुझे हर खुशी मिल जाए
वो सीना तुम्हारा हो
जिसका साथ पाकर
हर मुश्किल से लड़ सकूं
वो साथ तुम्हारा हो
जिसके कांधे पर सिर रखकर
हर गम को पी सकूं
वो कांधा तुम्हारा हो
जिसके सहारे
पूरा जीवन जी सकूं
वो प्यार तुम्हारा हो
जिसकी बांहो के घेरे में
मैं सुरक्षित महसूस करूं
वो घेरा तुम्हारा हो
मेरी हर सुबह हर शाम
पर पहरा तुम्हारा हो
बोलो न
क्या तुम दोगे मुझे ये हक
कि जिसका हाथ थामकर
मैं सात फेरे लूं
वो हाथ तुम्हारा हो
मेरे हर गम हर खुशी
हर दिन हर रात
हर लम्हे हर पल
पर नाम तुम्हारा हो
क्या निभाओगे मेरा साथ
ताउम्र मेरा हाथ थामकर
बनोगे तुम मेरे हमसफर
तुम भी करोगे मुझसे प्यार

तुम्हारी ‘हां’ के इंतजार में

Saturday, October 18, 2014

सांसें चली गर्इं



तेरा मुंतजिर कबसे खड़ा था तेरे इंतजार में
तू न आया देख उसकी सांसें चली गर्इं

रूह तो निकली नहीं जिस्म से उसके
दिल से लेकिन धड़कनें खोती चली गर्इं

कतरा-कतरा खून बह रहा है आंखों से
आंसू की बूंदें नसों में घुलती चली गर्इं

इश्क में तेरे वो जीकर फना हो गया
मौत आई और बस छूकर चली गई

यादें ही तेरी हैं अब उसके जीने का सहारा
बातों की शोखियां तो मिटती चली गर्इं

Sunday, October 12, 2014

रिश्ता पुराना है


एहसास ये नया सा है लेकिन रिश्ता पुराना है
महसूस करो तो हकीकत, नहीं तो फसाना है

कसमे, वादे, प्यार, वफा नहीं हैं बस कहने की बातें
इनके बिना बहुत ही मुश्किल जिंदगी बिताना है

तुम चुप रहकर ही बयां करो चाहत तुम्हारी
मुझे तो अल्फाजों में ही अपना प्यार जताना है

उम्मीद है कभी तो करोगे इजहार-ए-मोहब्बत
हर सांस के साथ मुझे इंतजार करते जाना है

तुम्हारे बिना कुछ नहीं हूं मैं जान लो ये तुम भी
तुम्हारे दिल का इक कोना ही अब मेरा ठिकाना है

एहसास ये नया सा है लेकिन रिश्ता पुराना है
महसूस करो तो हकीकत, नहीं तो फसाना है


Friday, October 10, 2014

यूं ही बीते जिंदगी का सफर


बेखयाली में अक्सर एक खयाल आता है 
कि हंसी हैं वादियां, घटाएं और चमन
आवारा सी फिजाएं हैं हर तरफ
नदी का किनारा एक खूबसूरत
लेटे हो तुम गोद में मेरी सिर रखकर
देख रही हूं मैं तुम्हें अपलक
तुम्हारा एक हाथ मेरे हाथ में है और
दूसरे हाथ से घुमा रही हूं मैं तुम्हारे 
बालों में उंगलियां
तुम्हारे चेहरे पर है हल्की सी मुस्कुराहट
मेरी आंखों में भी कुछ शर्म सी है
तुम्हारी आवाज में कशिश सी है
मेरे दिल में भी हलचल अजब सी  है
बैठी रहती हूं मैं यूं ही कई घंटों और 
तुम भी लेटे रहते हो बस इसी तरह
ख्वाब है ये मेरा सबसे बड़ा कि 
ये खयाल बन जाए मेरे जीवन की हकीकत
यूं ही बस यूं ही कट जाए हर लम्हा
यूं ही बीते जिंदगी का सफर 

Friday, October 3, 2014

इमरोज के लिए



जितना भी पढ़ूं तुम्हारे बारे में
उतना ही और पढ़ने का मन करता है
तुम्हारे बारे में और जानने का
तुम्हें महसूस करने का मन करता है
तुम्हारी संजीदगी से प्यार हो गया है मुझे
हो गया है मुझे तुम्हारी लेखनी से प्यार
तुम्हारी सोच से प्यार है मुझे
तुम्हारे समर्पण से प्यार है मुझे
तुम्हारी सादगी से प्यार है मुझे
तुम्हारे कैनवास
तुम्हारी कूंची से प्यार है मुझे
प्यार है मुझे तुम्हारे उस प्यार से
जो तुमने अमृता को किया
सच कहूं तो मुझे तुमसे प्यार है
तुम बहुत अच्छे हो इमरोज