Saturday, October 18, 2014

सांसें चली गर्इं



तेरा मुंतजिर कबसे खड़ा था तेरे इंतजार में
तू न आया देख उसकी सांसें चली गर्इं

रूह तो निकली नहीं जिस्म से उसके
दिल से लेकिन धड़कनें खोती चली गर्इं

कतरा-कतरा खून बह रहा है आंखों से
आंसू की बूंदें नसों में घुलती चली गर्इं

इश्क में तेरे वो जीकर फना हो गया
मौत आई और बस छूकर चली गई

यादें ही तेरी हैं अब उसके जीने का सहारा
बातों की शोखियां तो मिटती चली गर्इं

15 comments:

  1. नायाब पेशकश अनुषा,,,

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति रविवार के - चर्चा मंच पर ।।

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  3. इश्क में तेरे वो जीकर फना हो गया
    मौत आई और बस छूकर चली गई

    बहुत सुंदर पेशकश अनुषा,,,

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (20-10-2014) को "तुम ठीक तो हो ना.... ?" (चर्चा मंच-1772) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. दिल को छूती पंक्तियाँ बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ****** जब यकीन होता है कि,
    यादें ही तेरी हैं अब उसके जीने का सहारा
    बातों की शोखियां तो मिटती चली गर्इं

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  6. behtrin !

    आपकी इस रचना का लिंक दिनांकः 23 . 10 . 2014 दिन गुरुवार को I.A.S.I.H पोस्ट्स न्यूज़ पर दिया गया है , कृपया पधारें धन्यवाद !
    Information and solutions in Hindi ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )

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