Monday, October 20, 2014

तुम भी करोगे मुझसे प्यार

बहुत प्यार करती हूं मैं तुमसे
खुद से भी ज्यादा
शायद रह लूं मैं तुमसे दूर भी
लेकिन नहीं रहना चाहती मैं तुम्हारे बिना
आज मांगना है मुझे तुमसे एक हक
क्या तुम मुझे दोगे ये अधिकार कि
सुबह आंखें खोलकर जिसको
मैं सबसे पहले देखूं
वो चेहरा तुम्हारा हो
जिसके सीने में छिपने से
मुझे हर खुशी मिल जाए
वो सीना तुम्हारा हो
जिसका साथ पाकर
हर मुश्किल से लड़ सकूं
वो साथ तुम्हारा हो
जिसके कांधे पर सिर रखकर
हर गम को पी सकूं
वो कांधा तुम्हारा हो
जिसके सहारे
पूरा जीवन जी सकूं
वो प्यार तुम्हारा हो
जिसकी बांहो के घेरे में
मैं सुरक्षित महसूस करूं
वो घेरा तुम्हारा हो
मेरी हर सुबह हर शाम
पर पहरा तुम्हारा हो
बोलो न
क्या तुम दोगे मुझे ये हक
कि जिसका हाथ थामकर
मैं सात फेरे लूं
वो हाथ तुम्हारा हो
मेरे हर गम हर खुशी
हर दिन हर रात
हर लम्हे हर पल
पर नाम तुम्हारा हो
क्या निभाओगे मेरा साथ
ताउम्र मेरा हाथ थामकर
बनोगे तुम मेरे हमसफर
तुम भी करोगे मुझसे प्यार

तुम्हारी ‘हां’ के इंतजार में

13 comments:

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  2. बहुत ही सुन्दर और सरस रचना धन्यवाद
    http://safaraapka.blogspot.in/ आपका ब्लॉग यहा पर भी है जरुर पधारे http://rsdiwraya.blogspot.com/

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  3. वाह,,,ख़ूबसूरत एहसास,,,

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  4. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवार के - चर्चा मंच पर ।।

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  5. हाँ कहा है उन्होने
    उनकी अपनी
    कविता में उधर
    मैंने लिखा देखा है ।

    सुंदर भाव !

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    1. हाहाहा कहाँ लिखा देखा है आपने जोशी जी...मुझे एक बता दीजिए।।।
      प्रतिक्रिया के लिए आभार

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  6. अर्थ पूर्ण रचना ... छोटी सी चाह को बाखूबी लिखा है ...
    आपको दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें ...

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  7. दिल की गहराइयों से निकलने वाले मोती .....सुंदर ...

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    1. आभार कुमकुम जी

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी है और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - बुधवार- 22/10/2014 को
    हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः 39
    पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें,

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  9. बहुत ही गहरे और सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....

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