Friday, October 3, 2014

इमरोज के लिए



जितना भी पढ़ूं तुम्हारे बारे में
उतना ही और पढ़ने का मन करता है
तुम्हारे बारे में और जानने का
तुम्हें महसूस करने का मन करता है
तुम्हारी संजीदगी से प्यार हो गया है मुझे
हो गया है मुझे तुम्हारी लेखनी से प्यार
तुम्हारी सोच से प्यार है मुझे
तुम्हारे समर्पण से प्यार है मुझे
तुम्हारी सादगी से प्यार है मुझे
तुम्हारे कैनवास
तुम्हारी कूंची से प्यार है मुझे
प्यार है मुझे तुम्हारे उस प्यार से
जो तुमने अमृता को किया
सच कहूं तो मुझे तुमसे प्यार है
तुम बहुत अच्छे हो इमरोज

22 comments:

  1. एक ऐसी शख्सियत जिसकी अच्‍छाईयों को हर बार .... ढाई अक्षरों से नवाज़ा गया
    भावमय करती प्रस्‍तुति

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (04-10-2014) को "अधम रावण जलाया जायेगा" (चर्चा मंच-१७५६) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    विजयादशमी (दशहरा) की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. शुक्रिया शास्त्री जी

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  3. Bahut sunder rachna... Mujhe waise mloom nahi Imroz ji ke baare me lekin iss raachna se maloom padta hai wah unke humsafar hai.. Baaki adhik padhane ke liye kal google ki sahayata lenge.... Dhanywad !!

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    1. एक बार उनके बारे में पढ़कर देखिये परी जी आपका दोबारा पढ़ने का मन ज़रूर करेगा

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  4. इस प्यार को सलाम !

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  5. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 6/10/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

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  6. emroj ke baare me padhna aur unki baate karna.. jiondgi ko mahsus krne ki tarah hai..
    pyaar sachmuch nayab hota hai kitaabo me jarur dekha padha par is baat ko amrita emroj ki jindgi me gahrai tak dekha ja sakta hai
    pichhle kuchh samay se inhe padhna shuru kia hai to bs har pal har baat me unke hi examples dene lagi hu
    behad khoobsurat likha tumne anusha..bcos emroj realy deserves lov and ur passion

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    1. सच कहा स्मिता
      शुक्रिया

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  7. अमृता और इमरोज़ का नाम ही प्रेम का पर्याय है...बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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    1. सच कहा आपने
      प्रतिक्रिया के लिए आभार

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  8. इमरोज भी इस दुनिया में होते हैं विश्वास नही होता । रसीदी टिकिट पढ़कर जाना कि ऐसा समर्पण दुर्लभ है ।

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    1. सच गिरिजा जी... उनके जैसा समर्पण वाकई में दुर्लभ है

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    1. शुक्रिया अरमान जी

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  10. वाह प्रेम को एक अलग ऊंचाइयां दे दीं इन शब्दों ने ...

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