Friday, October 10, 2014

यूं ही बीते जिंदगी का सफर


बेखयाली में अक्सर एक खयाल आता है 
कि हंसी हैं वादियां, घटाएं और चमन
आवारा सी फिजाएं हैं हर तरफ
नदी का किनारा एक खूबसूरत
लेटे हो तुम गोद में मेरी सिर रखकर
देख रही हूं मैं तुम्हें अपलक
तुम्हारा एक हाथ मेरे हाथ में है और
दूसरे हाथ से घुमा रही हूं मैं तुम्हारे 
बालों में उंगलियां
तुम्हारे चेहरे पर है हल्की सी मुस्कुराहट
मेरी आंखों में भी कुछ शर्म सी है
तुम्हारी आवाज में कशिश सी है
मेरे दिल में भी हलचल अजब सी  है
बैठी रहती हूं मैं यूं ही कई घंटों और 
तुम भी लेटे रहते हो बस इसी तरह
ख्वाब है ये मेरा सबसे बड़ा कि 
ये खयाल बन जाए मेरे जीवन की हकीकत
यूं ही बस यूं ही कट जाए हर लम्हा
यूं ही बीते जिंदगी का सफर 

30 comments:

  1. आपकी लिखी रचना शनिवार 11 अक्टूबर 2014 को लिंक की जाएगी........... http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. beautifully written lines.. very touching and true..

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  3. बहुत खूब , मंगलकामनाएं आपको !!

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    1. शुक्रिया सक्सेना जी

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  4. वाह जी वाह शानदार अभिव्यक्ति

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा आज शनिवार (11-10-2014) को पथिक हूँ मैं (चर्चा मंच: 1763) पर भी है !
    --
    सौभाग्य और सुहाग की प्रतीक
    करवाचौथ की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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    1. आभार शास्त्री जी

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  6. बहुत ही बढ़िया

    सादर

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    1. बहुत धन्यवाद यश जी

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  7. बहुत सुंदर अनुषा जी ।

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  8. Bahut sunder abhivyakti .... umda zazbaat ..shubhkaamnaayein aapko

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  9. सुंदर ख्याल

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  10. behad sadagi se man ke udhati bhawnao ko sabd diye hai aapne

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  11. आमीन ... प्रेम का ये हसीं ख्वाब कभी न टूटे ...

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    1. इंशाअल्लाह ऐसा ही होगा

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