Tuesday, June 3, 2014

भारत और पाकिस्तान

बहुत से लोग चाहते हैं कि 
दो पड़ोसी मुल्क एक-दूसरे से
सारे रिश्ते-नाते तोड़ दें

तोड़ दें आत्मीयता की सारी जंजीरें
वे हमारे दुख में खुश हों
और हम उनके दुख में ठहाके लगाएं

आखिर हमारी दुश्मनी भी तो कई साल पुरानी है
उसे निभाना और आगे बढ़ाना 
हमारा ही तो फर्ज है

बंद कर दें हम उनके बारे में बात करना
यहां रहने वाली बहन का 
वहां रहने वाले भाई से मिलना

पाबंदी लगा दें सारे रिश्ते और नातों पर
आयात और निर्यात पर
सिखों के अपने तीर्थ ननकाना साहिब जाने पर

ये सब कर लेंगे हम 
तोड़ देंगे सारे संबंधों को और
बन जाएंगे महान अपनी ही नजरों में

लेकिन क्या हम दो देशों में
बहने वाले एक ही दरिया के पानी को
आपस में मिलने से रोक लेंगे

क्या रोक लेंगे हम उस पार की चिड़िया को
जो अक्सर सरहद पार कर
दाना लेने इधर आ जाती है

क्या यहां रहने वाले नाती का
वहां रहने वाली  नानी से
रिश्ता तोड़ पाएंगे हम

क्या लगा पाएंगे हम पाबंदी
उन लोगों की यादों पर जिन्होंने
वर्षों पहले अपने मुल्क को छोड़ा था

शायद नहीं कर पाएंगे ये सब 
इसीलिए अब और नहीं बांट पाएंगे हम
पहले से बंटे हुए इन दो मुल्कों को





9 comments:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

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    1. शुक्रिया..
      मेरी रचना को चर्चा मंच में स्थान देने के लिए।।

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  2. आपकी इस पोस्ट को ब्लॉग बुलेटिन की आज कि ब्लॉग बुलेटिन - श्रद्धांजलि गोपीनाथ मुंडे में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  3. Uttm vichar paraspar prem aur sauhardr hi shresth marg h

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  4. वाह। उम्दा रचना और खूबसूरत एहसास।
    दोनों देशो की आम जनता एक दूसरे को करीब महसूस कर सकती है। पर अपनी राजनीती की रोटियाँ सेक रहे लोग किसी कीमत पर ऐसा होने नही देना चाहते।

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  5. पोस्ट के शब्द और भावनाए अवश्य सुंदर है ! किन्तु क्या इस शान्ति सन्देश का कोई अर्थ रह जाता है ? जब हमें विशवास के बदले सिर्फ विश्वासघात ही मिले ?
    क्यों हम ही सिर्फ अपने प्रेम तराने उन लोगो के लिए छेड़े जिन्हें इसका अर्थ भी नहीं पता ?
    जोछूट चुका वह दुबारा नहीं मिल सकता ! भारत पाकिस्तान में शान्ति की बात करना ही बेमानी है !
    दोनों देशो की जनता एकदूसरे को चाहती है इस बात में कितनी सच्चाई है ?
    प्रेम तभी संभव है जब प्रेम का अर्थ समझनेवाला हो !
    जिनकी बुनियाद ही नफरत की ईंट से पड़ी है उनसे मोहब्बत की उम्मीद करना फिजूल है !
    ये मेरे विचार है , आपके विचार सुंदर है !

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