Tuesday, July 15, 2014

मेरी मोहब्बत

पहले भी कह चुके हैं
और आज फिर एक बार कहते हैं
कि हम तुमसे बहुत प्यार करते हैं
बेपनाह करते थे और बेइंतहा करते रहेंगे

सिर्फ इस जन्म में ही नहीं आने वाले
हर जन्म में हम तुमसे ही मिलेंगे
हमारी शक्ल-ओ-सूरत बदल जाएं लेकिन
अपनी मोहब्बद हम यूं ही निभाएंगे

हर जन्म में हम इश्क का रिश्ता 
बस ऐसे ही बढ़ाते जाएंगे
मंजिल हमें मिले न मिले
पर रास्ते बनाते जाएंगे

कभी तुम हवा सा बहते रहना
हम खुशबू सा उसमें बिखर जाएंगे
कभी तुम प्यासी धरती बन जाना
हम बादल सा तुम पर बरस जाएंगे

कभी तुम बन जाना अथाह सागर सा
हम नदी की धाराओं सा तुम में मिल जाएंगे
जब तुम धूप में चल रहे होगे कभी अकेले
हम परछाई बनकर तुम्हारा साथ निभाएंगे

कभी तुम बन जाना एक दरख्त सा
हम मिट्टी बन खुद में तुम्हारी जड़ों को फैलाएंगे
जो कभी न आई नींद तुम्हें हम
मां की तरह लोरी गाकर तुम्हें सुलाएंगे

ये वादा है हमारा तुमसे कि
जीवन की हर आपाधापी में 
हम साथ तुम्हारा निभाएंगे


48 comments:

  1. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 17/07/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

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  2. ख़ूबसूरत एहसास अनुषा,,,

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    1. शुक्रिया अरमान जी

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  3. Mohobbat ke khubsurat zasbaat...... lajawaab...

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    1. शुक्रिया परी जी

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  4. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 17- 07- 2014 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1677 में दिया गया है
    आभार

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    1. आभार जोशी जी

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  6. बहुत सुन्दर भावप्रणव रचना।

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    1. आभार शास्त्री जी

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  7. प्रेम प्रवाह ... अनेकों जन्मों तक बहता रहे ... आमीन ...

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    1. शुक्रिया दिगंबर जी
      सुम्मा आमीन

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  8. हम तुमसे बहुत प्यार करते हैं
    बेपनाह करते थे और बेइंतहा करते रहेंगे

    सुंदर प्रस्तुति..

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    1. धन्यवाद
      सादर

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  9. हाल हाल में प्यार कम नहीं होगा ... बहुत बढ़िया प्रस्तुति!

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  10. कभी तुम बन जाना अथाह सागर सा
    हम नदी की धाराओं सा तुम में मिल जाएंगे
    जब तुम धूप में चल रहे होगे कभी अकेले
    हम परछाई बनकर तुम्हारा साथ निभाएंगे

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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    1. धन्यवाद प्रतिभा जी

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  11. आपकी इस रचना का लिंक कल यानी शनिवार दिनांक - 19 . 7 . 2014 को I.A.S.I.H पोस्ट्स न्यूज़ पर दिया गया है , कृपया पधारें धन्यवाद !

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  12. अच्छा लगा ब्लाग पर आकर.

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  13. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना...

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    1. आभार कैलाश जी

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  14. बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
    बधाई मेरी

    नई पोस्ट
    पर भी पधारेँ।

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  15. खूबसूरत अभिव्यक्ति

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  16. सकारात्मक सोच वाली रचना बहुत पसंद आई मुझे
    हार्दिक शुभकामनाएं

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  17. जब तुम धूप में चल रहे होगे कभी अकेले
    हम परछाई बनकर तुम्हारा साथ निभाएंगे... lovely !

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  18. कभी तुम बन जाना अथाह सागर सा
    हम नदी की धाराओं सा तुम में मिल जाएंगे
    जब तुम धूप में चल रहे होगे कभी अकेले
    हम परछाई बनकर तुम्हारा साथ निभाएंगे

    समार्पित भाव से किया हुआ स्नेह ही तो सच्चा स्नेह होता है.

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    1. सही कहा आपने रंजन जी

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  19. कभी तुम हवा सा बहते रहना
    हम खुशबू सा उसमें बिखर जाएंगे
    कभी तुम प्यासी धरती बन जाना
    हम बादल सा तुम पर बरस जाएंगे
    एकदम बढ़िया

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