Friday, September 26, 2014

तू है


मेरी चाहत तू, मेरी जिंदगी तू, मेरा ईमान तू है
खलिस है तू दिल की, आराम तू है

कुदरत की रहमत तू, इश्क का पयाम तू है
छाया है मुझ पर जिसका सुरूर वो जाम तू है

शबनमी बूंद सा मखमल खयाल तू है
ढलते सूरज की अंगड़ाई सा अल्हड़ ख्वाब तू है

मेरी आशिकी का खूबसूरत कलाम तू है
जिसके बिना न जी पाऊं मैं वो हंसी नाम तू है

मेरा मकसद तू, मेरा जहां तू, मेरा मुस्तकबिल तू है
जिस राह से भी मैं गुजरूं उसकी मंजिल तू है

सालों से की हुई मोहब्बत का अंजाम तू है
खुदा से की हर मन्नत का ईनाम तू है

मेरी चाहत तू, मेरी जिंदगी तू, मेरा ईमान तू है
खलिस है तू दिल की, आराम तू है

27 comments:

  1. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 29/09/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

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  2. सालों से की हुई मोहब्बत का अंजाम तू है
    खुदा से की हर मन्नत का ईनाम तू है

    सुंदर प्रस्तुति...

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    1. बहुत आभार स्मिता जी

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  3. बहुत खूब अनुषा जी


    सादर

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (28-09-2014) को "कुछ बोलती तस्वीरें" (चर्चा मंच 1750) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    शारदेय नवरात्रों की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. धन्यवाद शास्त्री जी

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  5. इश्क का लाजवाब अभिव्यक्ति ...तु ही तु है !
    नवरात्रों की हार्दीक शुभकामनाएं !
    शुम्भ निशुम्भ बध - भाग ५
    शुम्भ निशुम्भ बध -भाग ४

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  6. समर्पित प्रेम की बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  7. मेरा मकसद तू, मेरा जहां तू, मेरा मुस्तकबिल तू है
    जिस राह से भी मैं गुजरूं उसकी मंजिल तू है..
    सब कुछ तेरे ही नाम है ... और मैं और मेरा क्या ... सब अचा बुरा तेरे ही नाम ... प्रेम के नाम ...

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    1. सही कहा आपने नासवा जी सब कुछ प्रेम के नाम.. प्रेम है तभी तो जीवन है ... प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद

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  8. प्रेम की भाषा ही ऐसी है। बहुत सुन्दर प्रस्तुति। स्वयं शून्य

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  9. सुंदर प्रेम कविता :)

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