Thursday, July 10, 2014

क्यों ये चांद दिन में नजर आता है


ख्वाबों खयालों में हर पल तेरा चेहरा नजर आता है
ऐ मेरे मालिक बता, क्यों ये चांद दिन में नजर आता है

लगा के काजल दिन को रात कर दो 
क्या कोई बता के नजर लगता है
क्यों ये चांद दिन में नजर आता है

क्यों ये दिल इतना बेवस है
कौन जाने क्या कशमकश है
मेरे मौला कुछ समझ नहीं आता है
क्यों ये चांद दिन में नजर आता है

ये नकाब हो गया है दुश्मन मेरा
रुख से जरा हटाओ दिखाओ दिलकश चेहरा
खुदा की नेमत को भी कोई छुपाता है
क्यों ये चांद दिन में नजर आता है

इतना आसां नहीं तुम्हें भुला देना
मदहोश हो जाऊं तो यारों हिला देना
उनकी आमद से मौसम बदल जाता है
क्यों ये चांद दिन में नजर आता है

हमें देखकर वो अक्सर घबरा जाते हैं
शायद रुसबा होने से डर जाते हैं
बेजान जिस्म पर क्यों तरस नहीं आता है
क्यों ये चांद दिन में नजर आता है

43 comments:

  1. बहुत ही सुंदर व नायाब , बेहतरीन रचना अनुषा जी धन्यवाद !
    I.A.S.I.H - ब्लॉग ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )

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  2. बहुत खुबसूरत रचना !
    नई रचना मेरा जन्म !

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  4. माशाल्लाह आप तो शायर हो गईं,,,

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    1. धन्यवाद
      सादर

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  6. मुझे टिप्पणी करने के लिए सच में कोई शब्द नहीं मिलते। बहुत खूब

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    1. आपका बहुत आभार संजय जी।।
      आप टिप्पणी जरूर करें... हर टिप्पणी से मेरा उत्साहवर्धन होता है।।

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    1. सादर धन्यवाद

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (12-07-2014) को "चल सन्यासी....संसद में" (चर्चा मंच-1672) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. धन्यवाद यशवंत जी

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  10. कल 13/जुलाई /2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  11. वाह..क्या ख़ूबसूरत अहसास...बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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    1. धन्यवाद कैलाश जी

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  12. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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    1. शुक्रिया प्रतिभा जी

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  13. सुंदर प्रस्तुति , आप की ये रचना चर्चामंच के लिए चुनी गई है , सोमवार दिनांक - १३ . ७ . २०१४ को आपकी रचना का लिंक चर्चामंच पर होगा , कृपया पधारें धन्यवाद !

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  14. बहुत खूब ... दिन में चाँद नज़र आयेगा तो सूरज किधर जाएगा ...
    लाजवाब प्रस्तुति ...

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    1. धन्यवाद दिगम्बर जी

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  15. वाह क्या बात है अनुषा। एकदम प्रेम में भीगे हुए ज़ज़्बात। बहुत ही प्यारी ग़ज़ल

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  16. उम्दा प्रस्तुति

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    1. शुक्रिया महेंद्र जी

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  17. Ati sunder rachna.........shubhkamnayein..

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  18. बहुत ही गहरे भावो की अभिवयक्ति......

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    1. शुक्रिया सुषमा जी

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  19. शब्दों की चित्रकारी बेहद खुबसूरत
    God ब्लेस्स you

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    1. आभार विभा जी

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