Thursday, June 21, 2012

एक हंसी ख्वाब


कभी खुली तो कभी बंद आंखों से देखा था एक ख्वाब
कभी सोते तो कभी जागते हुए देखा था एक ख्वाब
एक हंसी हमसफर का हाथ थामे समंदर के किनारे टहलने का ख्वाब
उसकी बाहों में बाहें डाले अम्बर की ऊंचाइयां छूने का ख्वाब
उसकी एक प्यारी सी मुस्कुराहट के लिए कुछ भी कर गुजरने का ख्वाब
उसके चेहरे को देखकर सूरज के उगने और शाम के ढलने का ख्वाब
खुद को उसकी पलकों में छुपाकर जिंदगी गुजारने का ख्वाब
मुझे है यकीं एक दिन खयालों से निकलकर हकीकत से रूबरू होगा मेरा ख्वाब


No comments:

Post a Comment