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तुमसे ही है इस दिल को करार

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मेरी जिंदगी मेरी जरूरत हो तुम मुमकिन नहीं है मेरे लिए तुम्हारे बिना रहना मैं हूं थोड़ी अक्खड़, कुछ बत्तमीज भी झगड़ती हूं तुमसे और रोती भी हूं बेवजह तुम्हारी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाती मैं जैसा तुम चाहते हो वैसी नहीं बन पाती मैं कोशिश तो करती हूं मैं कि बदल दूं खुद को पर मेरी गलतियां ही फेर देतीं हैं मेरी मेहनत पर पानी जुबां बहुत कड़वी है मेरी, पर दिल में तुम ही हो बिन सांसों के हो जैसे जीवन वैसे ही हूं मैं तुम्हारे बिन कि मेरा दिल भी धड़कता है तुम्हारी धड़कनों से तुम्हारा अहसास ही जगाता है मुझमें जीने की चाहत आँखें खुली हों या बंद आते हैं उनमें तुम्हारे ही सपने चाहती हूं कि जिंदगी का हर पल गुजरे तुम्हारे साथ कि तुम ही तो इस पूरे जहां में मेरे अपने मेरी नादानियां कहो या कहो तुम बदमिजाजी पर तुमसे ही बनता है मेरी ख्वाहिशों का मिजाज माना मैं हूं गलत पर तुम तो हो सही माफी मांगती हूं मैं तुमसे फिर एक बार जहां हो तुम मैं हूं वहीं  कि तुमसे ही है इस दिल को करार

ऐतबार

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तुम भले ही न करो अपने प्यार का इकरार पर मुझको है तुम पर पूरा ऐतबार तुम्हारी हूं मैं और रहूंगी भी तुम्हारी करूंगी सात जन्मों तक मैं तुम्हारा इंतजार कभी तो बयां करोगे तुम अपने जज्बात कि तुम्हारे सीने में दबा है बस मेरा प्यार कोशिश कर लो रोकने की खुद को चाहे जितनी तुम्हें आना ही होगा मेरे पास बार-बार पलकों में मेरी सूरत को छुपा पाओगे कैसे आंखों की जुबां के भी तो लफ्ज होते हैं हजार तुम्हें पाना है मेरी जिंदगी की ख्वाहिश मिलो तुम मुझे जहां के इस पार या उस पार तुम भले ही न करो अपने प्यार का इकरार पर मुझको है तुम पर पूरा ऐतबार

आओगे तुम एक दिन

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तुम्हारी नारज़गियों को भी दिल से अपनाया हमने और तुम हमारी मोहब्बत को ठुकरा कर चल दिए सोचा था जिएंगे-मरेंगे साथ हम घड़ी दो घड़ी तुम बिताकर चल दिए किस्मत से अपनी हर पल हमने माँगा तुम्हें बदकिस्मती का दामन तुम थमा कर चल दिए पलकों में अपनी तुम्हें छुपाया था हमने और नज़रें तुम हमसे चुरा कर चल दिए चाहत पे अपनी था बहुत नाज़ हमें बेवफा तुम हमको बताकर चल दिए यकीं है मुझे वापस आओगे तुम एक दिन भले ही मोहब्बत के वादों को भुलाकर चल दिए 

इंतज़ार

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जानती थी कि हमारे रिश्ते को भी मिलेगी एक मंजिल और उसके आखिरी मोड़ तक चलूंगी तुम्हारे साथ हां, मंजिल तो मिली पर हाथ छुड़ा लिया तुमने ऐसा तो नहीं सोचा था मैंने मैंने तो तुम्हें पूरी शिद्दत से चाहा था हां थोड़ी नादान हूं मैं और कुछ बत्तमीज भी लेकिन इतनी बुरी हूं क्या कि मेरे साथ रहना मुश्किल हो गया तुम्हारे लिए क्या मेरी आंखों में तुम्हें कभी नहीं दिखी अपनी सूरत क्या मेरी दुआओं में तुमने अपनी सलामती की दुआ नहीं सुनी क्या मेरे आंसुओं में सिर्फ बनावट नजर आई तुम्हें या मेरी मोहब्बत में बस मिलावट मिली तुम्हें रिश्ते में झगड़े भी होते हैं और नाराजगी भी लेकिन क्या सिर्फ इन वजहों से खत्म हो जाती है उनकी पाकीजगी क्या वाकई इतनी नाजुक होती है इन चाहत के रिश्तों की डोर जो एक झटके में टूट जाते हैं यकीं के सारे धागे फिर लग जाती है उनमें हमेशा के लिए एक गांठ और गांठ भी ऐसी कि उसकी चुभन का अहसास हर पल होता रहे चलो छोड़ो न अब... मान भी जाओ न करो इतना गुस्सा... तुम्हारी ही तो हूं मैं डांट लो तुम मुझे जी भरकर और कर लो अपना मन हल्का फिर से एक बार लगा लो मुझे गले से कि तुमसे दूर रहकर नहीं जी...

ज़िन्दगी का सफर

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तेरी हर मुश्किल को अपना बनाकर  तुझे जानेजां अपने दिल में बसाकर  मंज़िलों को पाने की उम्मीदें जगाकर  चलते गिरते सम्भलते कटेगी डगर  तेरी एक मुस्कुराहट पे जां को लुटाकर तेरे ग़मों को दामन में अपने समाकर  कर दूँ क़ुर्बां मैं दिल को तेरे क़दमों में लाकर मेरा साया बनेगा धूप में एक सजर  तेरी ख्वाशिओं में अपने सपने संजोकर  करुँगी उनको पूरा तमन्नाओं में पिरोकर  तेरा हाथ थाम मैं चलूंगी हर राह पर  तुझे पाकर होगा पूरा ज़िन्दगी का सफर 

तुम्हारी यादें

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क्या करूं मैं तुम्हारी इन यादों का तुमसे मिलकर जो आई मैं बैग में चली आई हैं मेरे साथ हर वक्त पास रहने की जिद करती हैं कहीं भी जाऊं चल देती हैं उंगली पकड़कर कभी डांट देती हूं मैं उन्हें सताने पर तो शरारत भरी नजरों से मुस्कुरा देती हैं तुम्हें सोचकर जो रोती हूं मैं कभी तो गले लगाकर चुप कराती हैं तुम्हारी खुशबू को मेरी सांसों में महकाती हैं कभी अपने नटखटपन पर इतराती हैं कभी दर्द होने पर मेरा सिर भी सहलाती हैं कभी कभी छुप जाती हैं तकिए के नीचे मुझे चिढ़ाने के लिए तो सिरहाने बैठकर रातभर बतियाती हैं कभी अच्छा ही है जो चली आईं हैं ये मेरे साथ तुमसे दूर रहकर भी नजदीकियों का अहसास दिलाती हैं सभी

तुम्हारा अहसास

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तुम्हारे साथ गुजारा हर लम्हा जैसे कैद हो जाता है मेरे जेहन में जब भी झुकाती हूं मैं पलकें मुस्कुराते हुए तुम उतर आते हो मेरी अधखुली आंखों में मेरे हाथों को हर पल होता रहता है तुम्हारी छुअन का अहसास सिहरन सी होती रहती है दिल में तुम्हारी नजरों की शरारत को याद कर अलसाई सी सुबह दिलकश हो जाती है ख्वाबों में जब कभी आ जाते हो तुम ठंडी शाम सुरमई सी नजर आती है तुम्हारे आगोश में सिर छुपाए हुए मेरी गोद में सिर रखकर जब  लेट जाते हो तुम बेपरवाह से तो लगता है कि वो पल थम जाए वहीं और उस रात की फिर कभी सहर न हो