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वादा स्वस्थ रहने का

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हर वर्ष 7 अप्रैल को  ‘विश्व स्वास्थ्य दिवस’  मनाया जाता है। इसी दिन सफल जीवन के लिए स्वास्थ्य के महत्व को समझते हुए 7 अप्रैल, 1948 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की स्थापना की गई थी। अंग्रेजी में एक कहावत है ‘हेल्थ इज वेल्थ’ अर्थात स्वास्थ्य ही पूंजी है। लेकिन वर्तमान परिदृश्य पर नजर डालें तो शायद ही कोई व्यक्ति अपने स्वस्थ शरीर के महत्व को समझता हो। दुनिया के अधिकांश देशों में आज ऐसे हालात बन गए हैं जिनमें जटिल और तनावग्रस्त जीवनशैली से जूझता हुआ व्यक्ति ना तो अपने खान-पान पर ध्यान देता है और ना ही अपने स्वास्थ्य की अहमियत समझता है। हममें से कुछ लोग ऐसे हैं जो अपने काम और व्यस्तता के चलते अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पाते तो कुछ लोग ऐसे हैं जो पर्याप्त साधन न होने के कारण इस ओर ध्यान नहीं दे पाते। इस विश्व स्वास्थ्य दिवस पर एसएन मेडिकल कॉलेज के भूतपूर्व प्रोफेसर सीनियर कसंल्टेंट फिजीशियन डॉ. बीबी माहेश्वरी से बात करके हमने जाना कि सामान्य तौर पर होने वाली बीमारियां कौन-कौन सी हैं और हम उनसे बचकर कैसे स्वस्थ जीवन जी सकते हैं.... कम्यूनिकेबल डिजीजेस कम्यूनिकेबल ...

कौन है वो

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कभी तपती धूप में भी जुगनू सा चमकता है वो कभी चांद की  रोशनी में दिए सा जलता है वो कभी लाल गुलाब पर गिरी शबनमी बूंद की तरह इतराता है वो कभी मां के गले में पड़ी तस्बीह के दाने जैसा इठलाता है वो कभी आसमान में बादलों के झुंड सा नजर आता है वो कभी बारिश की बूंदों सा धरती पर गिर जाता है वो कभी मुझे ख्वाबों में जगाकर खुद सो जाता है वो कभी दादी की लोरी की तरह मुझे थपथपाता है वो कभी जमीन पर उगी घास की तरह पैरों को गुदगुदाता है वो कभी पेड़ की डाल पर बैठी कोयल की तरह गुनगुनाता है वो कभी बहती हवा में मोगरे की सुगंध सा बिखर जाता है वो कौन है वो, कहां है वो मेरे ही सवालों में मुझे उलझाता है वो, कहां-कहां मैं ढूंढूं उसे, हर जगह तो मुझे नजर आता है वो....

सुंदरता और रुपये

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लोग कहते हैं कि सुबह-सुबह देखा हुआ ख्वाब सच हो जाता है उसने भी तो देखा था भोर की पहली किरण के साथ एक ख्वाब देखा था उसने की उसके लिए भी खुदा ने चुना है एक हमसफर को देखा था उसने कि कोई भीड़ में से निकलता हुआ आ रहा है उसके पास और उसका हाथ थामकर ले जाता है उसको अपने साथ लेकिन अभी तक नहीं सच हुआ उसका ये सुबह को देखा हुआ ख्वाब अब तो जिंदगी के पैंतीस बसंत निकल चुके हैं उसे इंतजार करते हुए, लेकिन कोई नहीं उसका हाथ थामने क्या गलती थी उसकी, शायद ये कि उसका रंग बाकी लड़कियों की तरह गोरा नहीं था, हां शायद सांवला होना ही उसकी गलती थी.. तो क्या हुआ गर वो सांवली थी..पढ़ने में तो तेज थी, खाना बनाना भी जानती थी घर के सारे कामों में तो उसकी मम्मी ने उसे पहले से ही निपुण कर दिया था लेकिन एक लड़की की शादी होने के लिए इस सब से ऊपर होता है उसका गोरा होना सुंदर होना... ऐसा नहीं था कि सिर्फ सुंदर होना ही उसके ब्याहता न होने की सबसे बड़ी वजह थी एक और भी कारण था इसका, उसके ‘ कु ’रूप होने से भी बड़ा कारण दूल्हा खरीदने के लिए उसके किसान बाप के पास रुपये नहीं थे... बिना गुणों के, बिना रूप के, यह...

पथराए नैन

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पिया से मिलन की आस में पथरा गए मोरे नैन पिया न मिलन को आए मोहसे बीतीं जाने कितनी रैन बीतीं जाने कितनी रैन कि न आया पिया का संदेशा फंस गए होंगे किसी काम में हुआ दिल को ऐसा अंदेशा इस अंदेशे में दिन काटे और काटीं कितनी रातें अब तो करने लगीं हूं मैं खुद से ही खुद की बातें बातें करते-करते हो जाती सुबह से शाम दिन बीत जाता है पूरा पर न होता मुझसे कोई काम सखियां कहते मुझसे तो हो गई है रे पागल अंसुअन की धार में बहता तेरी आंखों का काजल मैं कहती काजल का क्या है ये तो फिर से लग जाएगा पिया न आए गर मोरे तो इन अंखियन को कुछ न भाएगा

लड़का और लड़की

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कई दिन हो गए उनका इंतजार करते हुए लेकिन अभी तक नहीं आए वो कहा था उनसे कि इस बार थोड़ा जल्दी आना पापा-मम्मी से बात करना हमारी शादी की लेकिन वो तो ऐसे गए कि अब तक न आए कहां गए, क्यों गए कुछ बताया ही नहीं बहुत कोशिश की पता लगाने की कि कहां हैं वो एक दिन उनके एक दोस्त को कहते सुना था कि किसी और के साथ कर ली है उन्होंने शादी लेकिन सुन कर भी कानों को भरोसा न हुआ दिल को विश्वास है कि वो ऐसा कुछ कर ही नहीं सकते बहुत प्यार करते हैं वो मुझसे लेकिन हो भी तो सकता है, याद आया कि कुछ दिनों से एक लड़की से कुछ ज्यादा ही बातें करने लगे थे वो कहीं उससे ही तो नहीं, नहीं ऐसा नहीं हो सकता वो तो सिर्फ दोस्त थी उनकी, दोस्तों से शादी थोड़े ही करते हैं दिल को समझाकर फिर करने लगी उनका इंतजार अचानक एक दिन दरवाजे पर दस्तक हुई सामने खड़े थे वो और उनके साथ उनकी दोस्त लेकिन अब तो वो उनकी बीवी बन चुकी थी एक पल को तो लगा जैसे कि ये हकीकत नहीं सपना है अपना दिल ही अपनी आंखों पर  यकीन नहीं कर पा रहा था उनसे कहा ये तो आपकी दोस्त थी न, लेकिन फिर खुद ही अपने सवाल का जवाब मिल गया कई लोगों की कह...

मोहब्बत का अहसास

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 दूर-दूर तक पसरी ख़ामोशी...ना कोई साथ है ना किसी के साथ की ख्वाहिश... वीरान तन्हाई में भी तुम्हारी यादों का काफिला साथ है...तुम पास न सही,  तुम्हारे होने का अहसास तो साथ है...कितना अजीब होता है किसी की चाहत का असर.. किसी की मोहब्बत का नूर, जो कभी तन्हाई में भी मोहब्बत की महफ़िल सजा देता है,  तो कभी भीड़ में भी तनहा कर देता है...ना कहने के लिए अल्फाज़ की जरूरत होती है... ना नज़रों से हाले दिल बयां होता है...हम बस ख़ामोशी से उन्हें देखते रह जाते हैं और... ना जाने कब चुपके से ये दिल उनका हो जाता है... कितने खुशनसीब...

प्यार क्या है??

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कोई कहता है प्यार आवाज नहीं, कोई कहता है प्यार खामोश नहीं, कोई कहता है प्यार खुशियों की नदी है, तो कोई कहता है कि प्यार गम का सागर है। किसी को शम्मा में जलते हुए परवाने का प्यार नजर आता है तो किसी को चांद तारे तोड़ कर लाने का इकरार समझ आता है। कोई कहता है प्यार में पाना ही सब कुछ नहीं तो कोई कहता है जो खो जाए वो प्यार नहीं। कोई प्यार में जान देने को तैयार है तो कोई कहता है जान लेना कहां का प्यार है। किसी को कभी न मिलने वाले रोमियो जूलियट और लैला मजनू का प्यार सदाबहार लगता है कोई साथ-साथ जीने और मरने वाले दादा-दादी के प्यार के किस्से सुनाता है। हर किसी की प्यार की अपनी-अपनी परिभाषा है, प्यार के बारे में बताने का, प्यार को तोलने का, मापने का तरीका है, लेकिन मैं आज तक नहीं समझ पाई कि आखिर प्यार क्या है??? राधा और कृष्ण का प्यार सच्चा है या मेरे पापा मम्मी का प्यार अच्छा है??