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मोहब्बत का अहसास

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 दूर-दूर तक पसरी ख़ामोशी...ना कोई साथ है ना किसी के साथ की ख्वाहिश... वीरान तन्हाई में भी तुम्हारी यादों का काफिला साथ है...तुम पास न सही,  तुम्हारे होने का अहसास तो साथ है...कितना अजीब होता है किसी की चाहत का असर.. किसी की मोहब्बत का नूर, जो कभी तन्हाई में भी मोहब्बत की महफ़िल सजा देता है,  तो कभी भीड़ में भी तनहा कर देता है...ना कहने के लिए अल्फाज़ की जरूरत होती है... ना नज़रों से हाले दिल बयां होता है...हम बस ख़ामोशी से उन्हें देखते रह जाते हैं और... ना जाने कब चुपके से ये दिल उनका हो जाता है... कितने खुशनसीब...

प्यार क्या है??

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कोई कहता है प्यार आवाज नहीं, कोई कहता है प्यार खामोश नहीं, कोई कहता है प्यार खुशियों की नदी है, तो कोई कहता है कि प्यार गम का सागर है। किसी को शम्मा में जलते हुए परवाने का प्यार नजर आता है तो किसी को चांद तारे तोड़ कर लाने का इकरार समझ आता है। कोई कहता है प्यार में पाना ही सब कुछ नहीं तो कोई कहता है जो खो जाए वो प्यार नहीं। कोई प्यार में जान देने को तैयार है तो कोई कहता है जान लेना कहां का प्यार है। किसी को कभी न मिलने वाले रोमियो जूलियट और लैला मजनू का प्यार सदाबहार लगता है कोई साथ-साथ जीने और मरने वाले दादा-दादी के प्यार के किस्से सुनाता है। हर किसी की प्यार की अपनी-अपनी परिभाषा है, प्यार के बारे में बताने का, प्यार को तोलने का, मापने का तरीका है, लेकिन मैं आज तक नहीं समझ पाई कि आखिर प्यार क्या है??? राधा और कृष्ण का प्यार सच्चा है या मेरे पापा मम्मी का प्यार अच्छा है??

प्रपोज वाला इजहार

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हो गया है हमको तुमसे इश्क वाला लव जी करता लिखूं तुमको इक लेटर वाला खत लेकिन खत लिखने में लगता है हमको बहुत टाइम वाला वक्त क्योंकि अंग्रेजी में है हमारा हाथ बहुत टाइट वाला सख्त कोई ऐसा तरीका बताओ जिससे हम तुमको कर सकें प्रपोज वाला इजहार आजकल मेरा दिल रहने लगा है बहुत बेकरार इंस्टेंट प्रक्रिया का कोई तो तरीका बताओ अब डिले करके इतना हमको न सताओ कहीं ऐसा न हो कि प्रपोज डे के बाद निकल जाए वैलेनटाइन डे भी फिर बीत जाए बसंत का सीजन भी खुशगवार और हमें करना पड़े एक साल फिर वेट वाला इंतजार.... .....अुनषा मिश्रा

प्यार का रंग

ब्लैक एंड व्हाइट पेंटिंग जैसी मेरी इस जिंदगी में तुमने आकर प्यार की कूंची से बेहिसाब रंग भर दिए पहले अकेले तन्हा रहती थी मैं जिंदगी को एक बोझ की गठरी समझकर ढोती थी मैं लेकिन तुम्हारे आते ही लगा जैसे कि बोझ की वो गठरी छिटककर कहीं दूर जा गिरी हो और जिंदगी की सारी मुश्किलें उसमें से निकलने को बेताब हो रही हों बहुत हल्कापन महसूस हुआ था मेरे दिल को उस दिन धीरे-धीरे तुमसे बातें करना अच्छा लगने लगा था फिर न जाने कब उन बातों ही बातों में तुमसे प्यार हो गया और फिर एक दिन आया जब उस प्यार का इकरार हो गया उस दिन से मैं हो गई तुम्हारी और तुम मेरे हमेशा के लिए अब तो मुझे अपनी ब्लैक एंड व्हाइट यादें भी रंगीन नजर आने लगी हैं तुम्हारा हाथ थामे जिंदगी में आगे बढ़ने की चाहत भरमाने लगी है अब बस इतनी इल्तजा है तुमसे कि यूं ही बस  यू हीं हमेशा तुम मेरा साथ देना और मेरे साथ रहना जिंदगी की इस गली के आखिरी मोड़ के आखिरी छोर तक।।। अनुषा मिश्रा

इबादत

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खुशियों की तलाश में निकले थे हम लेकिन नसीब में लिखे थे सिर्फ  गम सोचा न था कि वक्त हमें ये दिन दिखाएगा जिसकी हंसी के लिए मांगते हैं हम दुआएं,वही हमें रुलाएगा हमने तो खुद से बढ़कर के उसे चाहा हमेशा नहीं पता था कि वो मेरा  साथ यूं निभाएगा जिस पल में होगी मुझे उसकी सबसे ज्यादा जरूरत उस पल वो मुझे छोड़कर चला जाएगा पर क्या करें हम हैं बहुत मजबूर, लाख रोके इस दिल को लेकिन फिर भी सिर उनके लिए इबादत करने में झुक जाएगा

संस्कारों को पहनावे से न तोलें

खाप पंचायतें तो हमेशा से ही अपने बेबुनियादी फतवों के लिए जानी जाती रही हैं। खाप के सारे सदस्य महिलाओं को एक तुच्छ वस्तु समझते रहे हैं और उन पर हमेशा अपना अधिकार और आदेश थोपने की कोशिश करते रहे हैं। इस सब के बावजूद अगर हरियाणा के जींद जिले के बीबीपुर गांव में खाप में महिलाओं को बराबर का हक और सम्मान दिया जा रहा है तो ये बड़ी बात है और दूसरी ओर मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर के गांव दूधाहेड़ी में लड़कियां एक अलग पंचायत बनाकर खाप के फैसलों का समर्थन कर रही हैं और खुद खाप के बताए रास्ते पर चलने के लिए आतुर हो रही हैं। उन्हें खाप का 40 साल से कम उम्र की महिलाओं को घर से बाहर अकेले न निकलने और मोबाइल न रखने का फैसला गलत नहीं सही लग रहा है और वो इसके समर्थन में भी उतर आर्इं। एक ओर तो महिलाएं अपना बर्चस्व बचाने के लिए लड़ाई लड़ रही हैं और दूसरी ओर खाप के ऐसे फैसलों के समर्थन में आगे भी आ रही हैं। वो ये मानने के लिए तैयार हैं कि जींस पहनना, लम्बे नाखून रखना, बाल कटवाना और मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना उनके लिए सही नहीं है। क्या ये सही है? जैसे सूट एक पहनावा है वैसे ही जींस भी एक पहनावा है। सूट से भी पू...

मौत आनी है आएगी एक दिन

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फिल्मी जगत के सुपर स्टार राजेशखन्ना का बुधवार दोपहर मुंबई स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। 'पुष्पा मुझसे ये आंसू देखे नहीं जाते...आई हेट टियर्स' जैसा यादगार डायलॉग देने वाला ये सुपरस्टार लोगों की आंखों में आंसू देकर इस जहां से चला गया। आज शायद ही किसी को याद हो 1969 का वो दौर जब राजेश खन्ना एक हवा के हल्के झोंके की तरह आकर अपने जादुई मुस्कान से देश की हर युवा लड़की के दिलो-दिमाग पर छा गए। कई बार सुना है कि ये वो दौर था कि लड़कियों में राजेश खन्ना को लेकर ऐसी दीवानगी थी कि हर लड़की के तकिए के नीचे उनकी एक तस्वीर हुआ करती थी। 60-70 के दशक में जब लड़कियां घर के बाहर बिना पापा या भाई के साथ के कदम भी नहीं रखती थीं। तब ना तो हर घर में टीवी हुआ करते थे और ना ही फेसबुक, आरकुट जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स के जरिए फिल्मों और अभिनेताओं का प्रचार-प्रसार, उस दौर में जब सिर्फ अखबार के जरिए लोगों को फिल्मों के बारे में पता चलता था और सिनेमा हॉल में ही फिल्में देखी जाती थीं, लड़कियों का राजेश खन्ना के लिए दीवाना होना उनकी उस शख्सियत को बयां करता है जिसकी बस एक झलक पाने के  लिए घंटों तक स्टूडि...